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उद्योगपतियों को कमलनाथ सरकार का तोहफा....



वर्ष 2007 की अधिसूचना में किया बदलाव

अब सिर्फ प्रतिनिधि संगठनों से ही औद्योगिक संबंध निभाने होंगे

(डॉ. नवीन जोशी)

भोपाल।राज्य की कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के उद्योगपतियों को एक और तोहफा दिया है। अब उद्योगपतियों को औद्योगिक संबंध निभाने के लिये सिर्फ एक ही प्रतिनिधि श्रम संगठन से संबंध निभाने होंगे न कि अनेक ट्रेड यूनियनों से।
दरअसल पहले पन्द्रह साल से काबिज रही शिवराज सरकार ने मप्र औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960 के तहत 14 अगस्त 2007 को एक अधिसूचना निकाली थी, इस अधिसूचना में कहा गया था कि उक्त अधिनियम के प्रावधान 11 प्रकार के उद्योगों पर लागू नहीं होंगे अर्थात उद्योग के प्रबंधन को प्रतिनिधि श्रम संगठन के स्थान पर अनेक ट्रेड यूनियनों से संबंध निभाने होंगे। जिन 11 प्रकार के उद्योगों के लिये यह अधिसूचना निकाली गई थी उनमें शामिल थे : एक, टेक्सटाईल इनकुलिडिंग काटन, सिल्क, आर्टिफिशियल सिल्क, स्टेपल फाईबर, जूट एवं कारपेट। दो, आईरन एवं स्टील। तीन, इलेक्ट्रीकल्य गुड्स। चार, शुगर एवं इसके उपोत्पाद। पांच, सीमेंट। छह, इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन ट्रांसमीशन एवं डिस्ट्रीब्युशन। सात, पब्लिक मोटर ट्रांसपोर्ट। आठ, इंजीनियरिंग जिसमें शामिल है मेनुफैक्चिरिंग आफ मोटर व्हीकल्स। नौ, पोट्रीज जिसमें शामिल है रिफ्रेक्ट्री गुड्स, फायर ब्रिक्स, सेनीटरी वेअर्स, इनसुलेटर्स, टाईल्स, स्टोन, वेयर पाईप्स, फयुरेंस लाईनिंग ब्रिक्स एवं अन्य सिरेमिक गुड्स। दस, केमिकल एवं केमिकल प्रोडक्ट इण्डस्ट्रीज। ग्यारह, लेदर एवं टेनरीज जिसमें सम्मिलित है लेदर प्रोडक्टस।
उक्त उद्योगों के लिये इस प्रावधान से स्थिति यह बनी कि उन्हें प्रतिनिधि श्रम संगठनों के स्थान पर अनेक ट्रेड यूनियनों से औद्योगिक निभाने पड़े। रजिस्ट्रार आफ ट्रेड यूनियन में दो तरह के श्रम संगठन रजिस्टर्ड होते हैं जिनमें एक प्रतिनिधि श्रम संगठन तथा दूसरा ट्रेड यूनियन होती हैं। एक उद्योग में एक ही प्रतिनिधि श्रम संगठन दर्ज होता है जबकि ट्रेड यूनियन एक ही उद्योग में अनेक होती हैं। ऐसे में उद्योग के प्रबंधन को अनेक ट्रेड यूनियनों से औद्योगिक संबंध निभाने पड़ते हैं तथा इन सभी ट्रेड यूनियनों की मांगों पर विचार करना एवं निर्णय लेना पड़ता है। जबकि प्रतिनिधि श्रम संगठन एक ही होने के कारण उद्योग प्रबंधन को सिर्फ एक ही संगठन से बातचीत करना होती है।
अब कमलनाथ सरकार ने सोलह साल बाद नई अधिसूचना जारी कर दी है जिसके तहत अब सभी प्रकार के उद्योग के प्रबंधन को सिर्फ प्रतिनिधि श्रम संगठन से ही औद्योगिक संबंध निभाने होंगे तथा अनेक ट्रेड यूनियनों से बातचीत नहीं करना होगी। इससे उद्योग प्रबंधन को उद्योग चलाने में सहुलियत होगी। वर्ष 2007 में जिन 11 प्रकार के उद्योगों को अनेक ट्रेड यूनियनों से बातचीत करने का प्रावधान किया गया था वह अब समाप्त कर दिया गया है।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि अब कारखाना अधिनियम के अंतर्गत दर्ज उद्योगों को प्रतिनिधि श्रम संगठनों से ही औद्योगिक संबंध निभाने होंगे और उन्हें अपने यहां दर्ज अनेक ट्रेड यूनियनों की मांगों पर विचार नहीं करना होगा। इससे उद्योगों को सहुलियत मिलेगी।
इधर भारतीय मजदूर संघ की मप्र इकाई ने बताया कि राज्य सरकार के इस कदम का हम विरोध करेंगे। आगामी 21 नवम्बर को भेल दशहरा मैदान पर हमारी स्टेट यूनिट की सभा है जिसमें इन मुद्दों पर चर्चा कर विरोध की रणनीति बनाई जायेगी।


लोक अभियोजन संचालनालय : आफिशियल
वाट्सएप ग्रुप पर शिकायतें करने पर लगाई रोक

भोपाल।राज्य के गृह विभाग के अंतर्गत कार्यरत लोक अभियोजन संचालनालय के संचालक पुरुषोत्तम शर्मा ने आफिशियल वाट्सएप ग्रुप पर एक-दूसरे की शिकायतें करने पर रोक लगा दी है। यही नहीं, संचालक के व्यक्तिगत मोबाईल पर भी फोन काल्स/वाट्सएप मैसेज करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
इस संबंध में संचालनालय के सभी अभियोजन अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि प्राय: देखने में आ रहा है कि अभियोजन अधीकारीगण एक-दूसरे की शिकायतें विभाग के अधिकृत वाट्सएप ग्रुप पर तथा संचालक के व्यक्तिगत मोबाईल नंबर पर फोल काल्स/वाट्सएप मैसेज कर रहे हैं, जो आपत्तिजनक होकर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
दिशा-निर्देशों में आगे कहा गया है कि समस्त अभियोजन अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि अनावश्यक संदेश/शिकायतें विभाग के अधिकृत ग्रुप तथा संचालक के व्यक्तिगत मोबाईल नंबर पर फोन काल्स/वाट्सएप मैसेज न करें। यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी से कोई शिकवा/शिकायत है तो उचित माध्यम से संचालनालय प्रेषित करें अथवा संचालक से समक्ष में निवेदन कर सकते हैं। इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जावे अन्यथा मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही के भागीदार होंगे।
डॉ. नवीन जोशी

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