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राजसात हुये वाहन जिला अभियोजन अधिकारियों को मिलेंगे...



डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।राज्य के जिला कलेक्टरों द्वारा विभिन्न कानूनों के उल्लंघन के तहत राजसात किये जाने वाले चार पहिया वाहन गृह विभाग के अधीन कार्यरत लोक अभियोजन संचालनालय के अधिकारियों को आवंटित किये जाने की तैयारी प्रारंभ हो गई है।
दरअसल इस संबंध में पिछले दिनों संचालक लोक अभियोजन ने भोपाल से सभी जिलों के अभियोजन अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेन्सिंग की थी। इस कान्फ्रेन्सिंग में सतना के जिला अभियोजन अधिकारी रामपाल सिंह ने सुझाव दिया था कि जिला कलेक्टरों द्वारा जो चार पहिया वाहन विभिन्न कानूनों के उल्लंघन पर राजसात किये जाते हैं उनको जिला अभियोजन अधिकारियों को उपलब्ध करवाने की कार्यवाही की जाये। इस सुझाव को संचालक ने उपयुक्त पाया तथा संचालनालय स्तर पर इस मामले के विधिक परिपेक्ष्य पर विचार करने तथा विधिक रुप से यह कार्यवाही कैसे हो सकेगी, इस संबंध में एक कमेटी के गठन के आदेश जारी कर दिये हैं।
उक्त नवगठित कमेटी को कहा गया है कि वह पन्द्रह कार्य दिवस में अपनी रिपोर्ट संचालक को प्रस्तुत करे तथा प्रदेश के समस्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी इस कमेटी को ऐसे वाहनों की सूची उपलब्ध करायें जिनके विरुध्द राजसात की कार्यवाही की गई है और ये वाहन अच्छी कन्डीशन में हैं।
यह है कमेटी :
जारी आदेश के अनुसार, उक्त कमेटी के अध्यक्ष उप संचालक अभियोजन भोपाल केके सक्सेना बनाये गये हैं जबकि सदस्यों में जिला अभियोजन अधिकारी सतना रामपाल सिंह, जिअअ भोपाल राजेन्द्र उपाध्याय, जिअअ कटनी हनुमंतकिशोर शर्मा तथा जिअअ बैतूल एआर खान नियुक्त किये गये हैं।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि जिला अभियोजन अधिकारियों को आने-जाने के लिये कोई शासकीय वाहन नहीं मिलता है। उन्हें जिला कलेक्टरों द्वारा राजसात वाहन दिये जा सकते हैं। इसी संबंध में यह कमेटी बनाई गई है। अभी इस कमेटी की पहली बैठक की तिथि जारी नहीं हुई है। कमेटी अपनी रिपोर्ट संचालक को देगी तथा वहां से शासनस्तर पर मंजूरी होने जायेगी।

गरीबों को दस प्रतिशत आरक्षण में नया संशोधन जारी हुआ

भोपाल।राज्य सरकार ने आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण की सुविधा में नया संशोधन जारी किया है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नवीन ज्ञाप में कहा गया है कि 2 जुलाई 2019 से राज्य शासन के प्रत्येक ‘स्थापना’ में सीधी भर्ती हेतु उपलब्ध रिक्तियों पर उक्त आरक्षण लागू होगा। ‘स्थापना’ का आशय वही होगा जो मप्र लोक सेवा अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिये आरक्षण अधिनियम 1994 में वर्णित है। इस अधिनियम में ‘स्थापना’ का आशय बताया गया है कि राज्य सरकार का या तत्समय प्रवृत्त राज्य के किसी अधिनियम के अधीन गठित किसी स्थानीय प्राधिकरण या कानूनी प्राधिकरण का या किसी विश्वविद्यालय का या किसी ऐसी कंपनी, निगम या किसी सहकारी सोसायटी का, जिसमें समादत्त अंशपूंजी का कम से कम 51 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा धारित है या किसी संस्था का जो राज्य सरकार से सहायता, अनुदान या नकद भुगतान प्राप्त कर रही है, कोई कार्यालय और उसके अंतर्गत ऐसा स्थापन आता है जिसमें कार्यभारित या आकस्मिकता निधि से भुगतान किया जाता है और ऐसा स्थापन जिसमें आकस्मिक नियुक्तियां की जाती है, किन्तु इसमें संविधान के अनुच्छेद-30 के अधीन आने वाले स्थापन सम्मिलित नहीं हैं। अनुच्छेद-30 में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थायें आती हैं।
डॉ. नवीन जोशी

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