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लैंड एक्युजिशन एक्ट के नियमों में मप्र सरकार का बदलाव



निजी कंपनियों को भू-अर्जन कराने के लिये अवार्ड
की 80 प्रतिशत राशि अग्रिम जमा कराना होगी

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।भारत सरकार के नये लेंड एक्युजिशन एक्ट 2013 के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2015 में बनाये गये नियमों में कमलनाथ सरकार ने नया बदलाव कर दिया है। अब निजी कंपनियों को शहरी या ग्रामीण क्षेत्र की भूमि अपने प्रोजेक्ट हेतु संबंधित जिला कलेक्टर के माध्यम से अधिग्रहण कराने के पूर्व अनुमानिक अवार्ड राशि का 80 प्रतिशत अग्रिम जमा कराना होगा। पहले पचास प्रतिशत राशि अग्रिम जमा कराने का प्रावधान था।
इस संबंध में राज्य के राजस्व विभाग ने नियमों में संशोधन का प्रारुप जारी कर दिया है तथा जल्द ये नये संशोधित प्रावधान लागू हो जायेंगे।
पहले यह था प्रावधान :
मप्र भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम 2015 में प्रावधान था कि निजी कंपनी को अपने प्रोजेक्ट हेतु भूमि का अधिग्रहण कराने के आवेदन के साथ अधिगृहित भूमि के स्वामियों को भुगतान किये जाने वाले अनुमानित मुआवजा यानि अवार्ड राशि का पचास प्रतिशत जिला कलेक्टर के पीडी एकाउन्ट में जमा कराना होगी। तभी जिला कलेक्टर भूमि अधिग्रहण की घोषणा जारी करेंगे अन्यथा नहीं। शेष राशि अवार्ड
पारित होने के बाद सात दिन के अंदर जमा करना होती है।
अब यह किया नया प्रावधान :
राज्य सरकार ने उक्त प्रावधान में अब संशोधन कर दिया है। निजी कंपनियों से भूमि अधिग्रहण के आवेदन के साथ अनुमानित अवार्ड राशि की 80 प्रतिशत राशि अग्रिम जमा कराई जायेगी।
इसलिये किया यह नया प्रावधान :
यह नया प्रावधान इसलिये किया गया है क्योंकि भूमि अधिग्रहण से जिन किसानों आदि की भूमियां प्रभावित होती हैं, उन्हें इसका तत्काल मुआवजा दिया जा सके। ताकि उनके जीवन-यापन पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़े।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि जिन व्यक्तियों की अधिग्रहण से भूमि प्रभावित होती है उन्हें जल्द मुआवजा मिले, इसी के लिये यह नये प्रावधान का प्रारुप जारी किया गया है। केंद्र के भू-अर्जन कानून में निजी कंपनियों से मुआवजा किस प्रकार लिया जाये इसका उल्लेख नहीं है, इसीलिये राज्य सरकार ने नियमों में इसका प्रावधान किया है। पहले पचास प्रतिशत राशि अग्रिम जमा कराई जाती थी परन्तु अब 80 प्रतिशत राशि जमा कराई जायेगी।

निलम्बित उपयंत्री बहाल हुआ

भोपाल।राज्य शासन ने जल संसाधन संभाग गोहद में पदस्थ उपयंत्री अविनाश कुलश्रेष्ठ को त्रुटिपूर्ण कार्यवाही किये जाने के कारण 26 दिसम्बर 2019 को निलम्बित कर दिया था। इसके बाद श्री कुलश्रेष्ठ ने निलम्बन के विरुध्द अपील प्रस्तुत की जिसे शासन ने परीक्षणोपरान्त मान्य कर लिया। अब उनका निलम्बनल खत्म कर बहाल कर दिया गया है और उनकी पदस्थापना पूर्ववत कर दी है।
डॉ. नवीन जोशी

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