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पुलिस में दर्ज प्रकरण वापसी का अभियान शुरू


 
सांसद, विधायकों सहित सभी के लिए बने सरल नियम

राज्य शासन ने जारी किये नये निर्देश

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश सरकार ने जनप्रतिनिधियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस में दर्ज प्रकरण वापस लेने का अभियान प्रारंभ किया हुआ है। इन केसों को वापस लेने के लिये जब जिला न्यायालयों में शासन द्वारा अर्जी लगाई जाती है तब अनेक गंभीर प्रकरणों को न्यायालय वापस लेने से इंकार कर देता है। इसलिये अब राज्य शासन ने नये निर्देश जारी किये हैं कि केस वापस के मामले संबंधित न्यायालय में नामंजूर होने पर वरिष्ठ न्यायालयों में पुनरीक्षण याचिका लगाई जाये।
ये नये निर्देश संचालक लोक अभियोजन ने सभी जिला लोक अभियोजन अधिकारियों को जारी किये हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में भोपाल की एमपी/एमएलए कोर्ट में दर्ज करीब दो दर्जन मामले राज्य शासन ने वापस लिये हैं। इसके अलावा अन्य जिलों में भी दर्ज प्रकरण वापस लिये हैं। कतिपय केसों में संबंधित न्यायालय ने केस की गंभीरता को देखते हुये उन्हें वापस करने से इंकार कर दिया है।
इसी कारण से संचालक लोक अभियोजन ने नये निर्देश जारी किये हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि राज्य शासन ने गृह विभाग के माध्यम से लोकहित के प्रकरणों को वापस लेने के लिये सहमति प्रदान की है। इसलिये दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के प्रावधानों के तहत केस वापस की कार्यवाही में यदि आवेदन न्यायालय द्वारा निरस्त किया जाता है, उस स्थिति में, विधि अनुसार वरिष्ठ न्यायालय के समक्ष पुनरीक्षण की कार्यवाही की जाये।
ऐसा इसलिये :
ये नये निर्देश इसलिये जारी किये गये हैं क्योंकि राज्य शासन केस वापसी के अपने निर्णय पर अमल चाहता है। यदि संबंधित न्यायालय केस वापस न करे तो उसे वरिष्ठ न्यायालय में अपील कर वापस करवाया जा सके।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत शासन केस वापस लेता है। भोपाल में भी कई केस वापस हुये हैं। कई बार गंभीर प्रकृति के केसों को न्यायालय वापस करने से इंकार देता है। नये निर्देश आये हैं और इनके अनुसार पालन किया जायेगा।

तीन बार निलम्बित हुये सहायक
यंत्री के प्रकरणों का निपटारा हुआ

भोपाल।राज्य के जल संसाधन विभाग में पदस्थ रहे सहायक यंत्री तेजबली सिंह परिहार तीन निलम्बन प्रकरणों का राज्य सरकार ने निराकरण कर दिया है। उनकी निलम्बन अवधि का नियमितीकरण किया गया है तथा उन्हें निलम्बन अवधि का पूरा वेतन नहीं दिया जायेगा क्योंकि सेवानिवृत्त होने के बाद उनका निधन हो चुका है। पेंशन प्रकरणों में उनकी निलम्बन अवधि मान्य होगी।
ऐसा रहा प्रकरण :
श्री परिहार जब सीधी में पदस्थ थे तब उनके खिलाफ थाना चितरंगी ने अपराध दर्ज किया और वे गिरफ्तार हुये तथा 48 घण्टे तक निरुध्द रहे। उन्हें 15 दिसम्बर 1999 को निलम्बित किया गया। कोर्ट में उनके खिलाफ चालान पेश न होने पर उन्हें चार साल बाद 4 फरवरी 2003 को बहल कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ हुई पुलिस कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
इसके बाद श्री परिहार 11 मार्च 2008 से 8 मई 2008 तक प्रभारी कार्यपालन यंत्री पुरवा नहर संभाग क्रमांक-2 सतना में पदस्थ रहे तथा इस अवधि में अनियमिततायें करने पर उन्हें 8 मई 2008 को निलम्बित किया गया। उन्हें आरोप-पत्र जारी किया गया और 22 दिसम्बर 2008 को बहाल कर दिया गया।
जांच के बाद 28 मई 2015 को उन्हें पेंशन में से दस प्रतिशत राशि 3 साल तक वापस लेने का दण्ड दिया गया।इसी प्रकार, जब श्री परिहार उप संभाग क्रमांक-2 सीधी में पदस्थ थे तब उनके द्वारा पढऱी तालाब योजना में अनियमिततायें की गईं जिस पर 19 जुलाई 2007 के शासनादेश से उन्हें 4 वेतनवृध्दियां रोकने के दण्ड से दण्डित किया गया। इसी अनियमितता पर उनके खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने 23 जनवरी 2009 को विशेष न्यायालय सीधी में चालान पेश किया गया और उन्हें 8 जुलाई 2009 को निलम्बित किया गया। 30 जून 2012 को श्री परिहार को बहाल किया गया और इसी दिन वे सेवानिवृत्त हो गये। बाद में विशेष न्यायालय सीधी ने उन्हें 25 मार्च 2011 को दोषमुक्त कर दिया गया। 20 जून 2019 को श्री परिहार का निधन हो गया। इस पर अब उनकी तीन निलम्बन अवधि का पेंशन प्रकरणों हेतु निराकरण कर दिया गया है।
डॉ. नवीन जोशी

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