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वचन पत्र को धोखा दे रही कांग्रेस की सरकार.....



राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजी शिकायत

    रास नही आ रही 9 साल सेेेे जमे खनिज अफ़सरो की नीति

(डॉ.नवीन जोशी )

भोपाल। कांग्रेस सरकार अपने वचन पत्र के साथ छल कर रही हैं, सरकार की नई रेत नीति को देख कर तो  यही लगता हैं।कांग्रेस सुप्रीमों सोनिया गांधी को सप्रमाण शिकायत भेजने  वाले आरटीआई एक्टिविस्ट भुवनेश्वर मिश्रा ने बताया कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी किये गये वचन-पत्र को लागू करने का जिम्मा मुख्यमंत्री द्वारा सभी विभागों के प्रमुख सचिव एवं विभाग प्रमुखों को दिया गया था, परन्तु भाजपा के शासनकाल से 9 वर्षो से विभाग में जमे प्रमुख सचिव नीरज मण्डलोई एवं विभाग के संचालक विनीत कुमार आस्टीन द्वारा षडयंत्र पूर्वक वचन-पत्र के विरूद्ध जाकर रेत की खनन नीति बनाई एवं खनिज माफियाओं से मिलकर उसकी नीलामी कर दी गई । नीलामी के कारण पूरे प्रदेश के 41 जिलों में रेत के खनन एवं विक्रय पर खनिज माफियाओं का कब्जा हो गया है ।  इससे रेत महंगी हो गई है जिसके कारण गरीबों को मकान बनाना दूभर हो गया एवं सभी शासकीय कार्य भी ठप्प हो गए ।
मिश्रा बताते हैं कि दोनों अधिकारियों नीरज मण्डलोई एवं विनीत कुमार आस्टीन तथा उप संचालक अनूप मिश्रा ने वचन-पत्र के विरूद्ध बनाई गई खनन नीति के कारण मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार का जनाधार मध्यम एवं निम्न वर्ग के लोगों के बीच कमजोर हुआ है । इन अधिकारियों द्वारा खनिज माफियाओं के साथ पार्टनरशिप कर खनिज माफियाओं को लाभ पहुँचाया है ।
        रेत नियम 2018 में रेत की खदानों को ग्राम पंचायतों को अंतरित कर उनके अधिकार में रखा गया था तथा जो खदानें ठेकेदार को स्वीकृत थीं, उन्हें अवधि समाप्ति पर संबंधित पंचायतों को सौंपा जाना था । परन्तु नवीन म.प्र. रेत (खनन, परिवहन, भण्डारण एवं व्यापार) नियम 2019 बनाए गए हैं जिसमें जिले की खदानों को समूह बनाकर ई-निविदा से सफल बोलीदारों को दिए जाने का प्रावधान किया गया । यह भी प्रावधान किया गया कि सफल निविदाकार के अनुबंध करने पर पंचायतों की खदानें भी संबंधित ठेकेदार को अंतरित हो जाऐंगी । इस प्रकार नई नीति बनाक गौण रेत खदानों को ग्राम पंचायतों से छीन लिया गया । अन्य गौण खनिज की नई नीति बनाकर जो संशोधन किए जा रहे हैं उसमें गौण खनिजों की स्वीकृति के पूर्व केवल ग्राम पंचायतों से अभिमत लिए जाने का प्रस्ताव रखा है । ग्राम पंचायतों को गौण खनिजों के ग्रांट करने के कोई अधिकार प्रदान नहीं किए गए।
        मिश्रा ने आगे बताया कि म.प्र. राज्य खनिज निगम को राॅक फास्फेट की जो खदानें स्वीकृत हैं उनमें राॅक फास्फेट के उत्खनन व विक्रय का ठेका स्थानीय लोगों/आदिवासियों/ग्राम पंचायतों को देने की पारदर्शी प्रक्रिया नहीं बनाई गई है । बल्कि ये खदानें पारदर्शी टेंडर के आधार पर निगम द्वारा प्रदेश के बाहर के ठेकेदारों को उत्खनन हेतु सौंपे जाने का निर्णय लिया गया है ।
        नवीन रेत नियम 2019 बनाए गए हैं । इसके अध्याय पाँच में रेत खदानों के समूह की निविदा पश्चात कार्यवाही करने के लिए म.प्र. राज्य खनिज निगम को शामिल किया गया है । नए नियमों में रेत की ई-नीलामी को समाप्त कर ई-निविदा की कार्यवाही की गई है । ई-निविदा से ठेकेदारी प्रथा को जारी रखा गया है और इस नियम में म.प्र. राज्य खनिज निगम को ठेकेदारी प्रथा से अलग नहीं किया गया है ।
वचन पत्र का पालन नहीं बल्कि वचन पत्र के उलट कार्यवाही की गई  है । 
        रेत नियम 2019 में ई-निविदा से जिले की रेत खदानों को समूह के रूप में आमंत्रित करने का प्रावधान किया गया है । इसके अध्याय पाँच में कहीं भी सहकारिता क्षेत्र एवं वर्षो से निवास कर रहे स्थानीय लोगों को प्राथमिकता नहीं दी गई है । रेत नियम 19 के अध्याय 8 में वर्षो से निवास कर रहे स्थानीय लोगों की निजी भूमि स्वामी को खनन एवं विक्रय की अनुमति का प्रावधान समाप्त कर दिया है । यदि रेत विक्रय करना है तो उन्हें निकटतम समूह के ठेकेदार की शरण में जाना पड़ेगा ।
   
        मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को जानकारी भेजते हुए मिश्रा कहते हैं कि किसी प्रकार  की जाँच नहीं कराई जा रही है । बल्कि लीपापोती के नाम पर रेत के अवैध उत्खनन के प्रकरण राजस्व न्यायालय में दर्ज किए गए हैं जो बड़ी संख्या में राजस्व न्यायालय में लंबित है । जिन प्रकरणों में जुर्माना हुआ है उसकी वसूली भी जिलों में नहीं की जा रही है । म.प्र. राज्य खनिज निगम में रेत के जो घपले हुए हैं उसमें से एक भी घपले की जाँच नहीं कराई जा रही है । तत्कालीन सचिव एवं म.प्र. राज्य खनिज निगम के घोटालेबाज कर्मचारियों द्वारा ठेकेदारों की जमा सुरक्षा राशि नियम विरूद्ध तरीके से वापस कर दी गई है । वर्तमान संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म श्री विनीत आस्टिन द्वारा प्रदेश की एक भी रेत खदान का निरीक्षण नहीं किया गया है । वे 7 सातों से संचालक के पद पर पदस्थ हैं । वैसे भी संचालक के पद पर रहते जाँच कैसे संभव    है ।
        खनिज उत्खनन से निर्मित गड्ढों को भरने व वृक्षारोपण का दायित्व लीजधारी का है । उसके द्वारा माइनिंग प्लान का पालन नहीं किया जा रहा है । वर्तमान संचालक वी.के. आस्टिन की अध्यक्षता में जिले के अधिकारी ऐसी जाँच न कर जेब भरने में व्यस्त हैं ।
        प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग नीरज मण्डलोई एवं संचालक विनीत कुमार आस्टीन द्वारा वचन पत्र के किसी भी बिन्दु का पालन नहीं किया गया है । वचन-पत्र के बिन्दुओं पर मुख्यमंत्री एवं मंत्री को गुमराह करते हुए इन दोनों अधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की । कांग्रेस के वचन-पत्र में प्रदेश की जनता को लाभ देने के लिये कोई नीति नहीं बनाई गई है, इसके विपरीत इन दोनों अधिकारियों द्वारा रेत की खदानें प्रदेश से बाहर के बड़े खनिज माफियाओं के साथ सांठ-गांठ एवं पार्टनरशिप की नीति बनाई गई है । इस सबको लेकर पूरे प्रदेश में स्थानीय मध्यम एवं गरीब जनता के बीच में रोष व्याप्त है जिसका खामियाजा निश्चित तौर से कांग्रेस को आगामी नगरी निगम एवं पंचायत चुनावों में भुगतना पड़ सकता है ।
डॉ. नवीन जोशी

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